माँ का सफर





जमुना लाल जी पटना से १२० किलो मीटर दूर बिहार के राजपुर गाँव के हाई स्कूल में हेडमास्टर थे, पढाने में बड़े तेज थे और उन्हें गोल्ड मैडल मिला था। वो कहीं भी और अच्छी नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्हें अपने गाँव से बहुत प्यार था, और वहीं वो कुछ करना चाहते थे। २२ साल की उमर में उनकी शादी १७ साल की एक बड़ी सुंदर लड़की कमला से हुई।

उन दोनों की जोड़ी बड़ी अच्छी लगी सबको। जमुना लाल जी कद के थोड़े छोटे थे- ५ फीट ३ इंच के, लेकिन कमला शादी के समय उनसे १ इंच छोटी थी। कमला का बदन शादी के समय तक भरा नहीं था। शादी के बाद भी उसका कद बढ़ता गया और साल भर में अपने बेटे राहुल को जन्म देने के समय तक वो करीब ५ फीट ४ इंच की हो गई और उसका बदन भी गदरा गया। उनकी दूसरी संतान दीपा राहुल के ८ साल बाद पैदा हुई, लेकिन उसके जन्म के समय कमला को शारीरिक समस्या हो गई और उसका ऑपरेशन करना पड़ा, जिसकी वजह से वो फिर कभी माँ नहीं बन सकती थी।

तो फिलहाल अभी जमुना लाल जी ४४ साल के थे और कमला 40 की होने वाली थी। जमुना लाल जी जैसे तेज थे, मैं भी उतना ही तेज निकला और २१ साल की उमर मे आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस के आखिरी साल में था उनकी १३ साल की बेटी दीपा बड़ी सुंदर मासूम कली थी।

हर इन्सान की कोई न कोई कमजोरी होती है। जमुना लाल जी को हाई स्कूल में ही बीड़ी सिगेरेट की लत लग गई थी, जो कभी नहीं गई। कॉलेज में पीते रहे क्योंकि उससे वो रात भर जग कर पढ़ाई करने में मदद मिलती थी। खैर ! ४ साल पहले जमुना लाल जी को काफी तेज़ दमा शुरू हुआ। दमे ने उन्हें अशक्त कर दिया, लेकिन कम से कम जान लेवा नहीं था। लेकिन अभी ३ महीने पहले डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टी बी भी हो गई है और उन्हें किसी सैनेटोरियम में दाखिल कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर में सभी आस लगाये बैठे थे कि जब मुझे नौकरी मिलेगी तो सब ठीक हो जाएगा।

जमुना लाल जी ने अपने ख़राब सेहत की वजह से स्कूल जाना भी बंद कर दिया था, लेकिन सरकार ने कुछ मदद की जिससे घर का काम काज चलता था। पति, पत्नी और बेटी, तीनों जमुना लाल जी के घर के पहले मंजिल पर रहते थे और ऊपर के मंजिल पर सिर्फ़ १ कमरा था जो स्टोर के जैसे इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन पैसे की तंगी की वजह से जमुना लाल जी उसे अब खाली कर के किराये पर लगाने की सोच रहे थे।

जब मैं आखिरी परीक्षा देकर आया तो उसने ऊपर के कमरे को खाली किया और जब तक वो किराये पे नहीं लगता तब तक उसे अपना कमरा बना लिया। रिजल्ट निकलने से पहले ही मुझे कई नौकरियों के प्रस्ताव आए थे, जिसमे कई बहु-राष्ट्रीय कम्पनियाँ और अच्छी कम्पनियाँ थी। मैंने एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी की नौकरी स्वीकार कर ली थी, क्योंकि उसे यहाँ २ हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद उस कंपनी के ऑफिस में काम करने का मौका मिलेगा। कंपनी ने मुझे सिर्फ़ २ हफ्ते का समय दिया काम पर आने के लिए। मेरे लिए भी अच्छा था कि जल्दी नौकरी मिलने से जल्दी पैसा भी आना शुरू हो जाएगा।

पहली सुबह मेरी नींद पानी के हैन्ड-पम्प की आवाज़ से खुली। मैंने खिड़की से नीचे जो देखा, वो दृष्य देखकर अवाक रह गया।

आंगन के एक कोने में हैन्ड-पम्प एक हौज़ में था और उसके तीन ओर दीवार डाल कर एक बाथरूम जैसा बनाया हुआ था और बाथरूम के दरवाज़े पर एक कपड़े का पर्दा था। लेकिन बाथरूम के ऊपर कोई छत नहीं थी।

मैं ने देखा कि उसकी माँ बिल्कुल मादर जात नंगी पानी का हैण्ड पम्प चला रही थी। गदराया बदन और उसके उठे हुए मांसल गांड हैण्ड-पम्प चलने से थिरक रहे थे और उसकी बड़ी बड़ी आजाद चूचियां भी पेंग मार रही थी। यह दृश्य एक टक देखता ही रह गया, जैसे उसकी आँखें पथरा गई हों।

इसके पहले कई बार माँ को नहाने के बाद देखा था लेकिन हमेशा पेटीकोट को अपनी चूची के ऊपर बाँध कर नहाने जाती थी या फिर नहा के निकलती थी लेकिन आज की तरह बिल्कुल नंगी कभी नहीं देखा था।

माँ को शायद इस बात की ख़बर नहीं थी कि ऊपर के कमरे में राहुल है और वहां से सब कुछ दिख सकता है। हौज में पानी भरने के बाद वो मग से पानी लेकर नहाने लगी। नहाना क्या, ज्यादा पानी वो अपनी खड़ी चूचियों की घुंडी पर डालती थी। आज कल उसका सारा बदन जैसे हमेशा जलता रहता था। उसने लेडी डॉक्टर को बताया, तो लेडी डॉक्टर ने कहा कि इस उम्र में ऐसा ही होता है, इसे हॉट फ्लैश कहते हैं।

लेडी डॉक्टर ने ही बताया कि जब ज्यादा जलन हो तो ठंडे पानी से नहा लो। लेडी डॉक्टर को भी जमुना लाल जी के सेहत के बारे में मालूम था, इसलिए उसने हिचकिचाते हुए माँ को बताया कि जब ज्यादा गर्मी लगे तो ऊँगली से अपने को शांत कर लिया करो। माँ अब हर रोज तीन बार नहाने लगी और लेडी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जब भी वो नहाती, वो ऊँगली से अपने को झाड़ लेती। उसे कुछ रहत तो मिलती थी, लेकिन कहाँ ऊँगली और कहाँ एक मुस्टंड लंड। कोई तुलना नहीं।

खैर, सारी दुनिया से बेख़बर, ठंडे पानी से नहाने के बाद माँ ने अपनी ऊँगली से अपनी चूत पर साबुन लगा के मसलना शुरू किया। उसकी आँखें बंद हो गई और वो अपने होंठ काटने लगी। यह देख कर लण्ड भी खड़ा हो गया, और वो हलके हलके मूठ मारने लगा। माँ की काले काले घुंघराले बाल से ढकी चूत देखने में कोई मुश्किल नहीं हुई। ५-७ मिनट के बाद उसकी माँ के बदन में कम्पन हुई, और वो शांत हो गई। समझ गया कि माँ झड़ गई, और यह सब देख कर मूठ मारते हुए मैं भी निकल गया।

जब तक मैं वहां रहा, २ हफ्ते उसने दिन में तीन बार यही दृश्य देखा और मूठ मारा। वास्तव में वो दिन में भी इंतज़ार में रहता था कि उसकी माँ कब नहाने जायेगी। जब भी उसकी माँ घर में चलती, वो उसके चूतड़ और चूचियों कि थिरकन देखता ही रह जाता। कई बार तो माँ को सुबह मैं जबरदस्ती चोदने की भी ठानी। एक बार तो वो बाथरूम के पास जा कर लौट आया, यह सोच कर कि उसे इतना गरम करूँगा कि ख़ुद चुदाने आ जाएगी तब उसे कोई ग्लानि नहीं होगी।

२ हफ्ते के बाद मैं अपनी नौकरी पे चला गया, और फिर वहां से अमेरिका। लेकिन वह मन से माँ का नंगा रूप कभी नहीं भूल पाया। राहुल को अपनी माँ की इस दशा पर तरस भी आता था, कि ऐसी मस्त औरत को ऐसे कम उमर में पूरी चुदाई का सुख नहीं मिल पाया।

मैंने जब अमेरिका से पैसे भेजने शुरू किए तो घर की हालत भी ठीक होने लगी। माँ को एक सेल फ़ोन लेने को भी कहा, और वो अपनी माँ से हर हफ्ते बात करता था। फिर एक दिन उसने एक योजना बनाई और माँ से राय मांगी। योजना यह थी कि राहुल ६ महीने के बाद भारत आकर पिताजी को सैनेटोरियम में भरती करा देगा, और दीपा को कुरसेओंग के पब्लिक स्कूल में, और माँ को अमेरिका ले आएगा जिससे उसके खाने पीने का हिसाब भी ठीक हो जाएगा।



६ महीने के बा दमैं भारत आया, और योजना के मुताबिक पिता जी को सैनेटोरियम में और दीपा को बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया। इत्तेफाक से स्कूल के नए हेडमास्टर ने उनका घर किराये पर ले लिया तो वो भी समस्या हल हो गई। यह सब काम करने के बाद ट्रेन से माँ को लेकर दिल्ली चला। कार्यक्रम ऐसा था कि दिल्ली में वीसा के लिए १ हफ्ता लगेगा, और तब तक वो माँ को दिल्ली भी घुमा देगा।

मैं ने ट्रेन में वातानुकूलित श्रेणी में आरक्षण करवाया था, और माँ ट्रेन की सफाई देख कर अवाक् हो गई। राहुल और उसकी माँ को दोनों नीचे के बर्थ मिले थे, और ऊपर सिर्फ़ एक आदमी था । जब वो तीसरा आदमी शाम को बाथरूम गया तो मैं ने माँ को एक नाईट गाऊन दिया, और बोला कि ये सोने के लिए है, पहन लो। माँ को समझ नहीं आया कि उसे पहने कैसे, तो मैं ने कहा कि वो बाहर जाएगा तब सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ नाईट गाऊन इस तरह पहन लो, मैं ने माँ को उसकी साड़ी ब्लाउज के ऊपर से ही नाईट गाऊन पहना कर दिखाया।

फिर मैं बाहर चला गया, और २ मिनट के बाद आया तो देखा कि माँ मेरी की ओर पीठ कर के खड़ी थी। माँ ने कहा कि इसमे तो सामने से बिल्कुल खुला है, तो मैं ने बताया कि इसमें बेल्ट है ना बांधने के लिए। मैं ने बेल्ट के दोनों छोर पकड़ के पीछे से ही बेल्ट को बांधा और माँ को घूम कर सामने से दिखाने को कहा।

मैं ने जान बूझ कर ही ऐसा नाईट गाऊन ख़रीदा था जिसका गला काफ़ी नीचे तक कटा था, और वह घुटने से ४ इंच ऊपर तक ही था। मैं ने यह भाँपते हुए कहा कि माँ तुम अमेरिका में लोगों को जैसा कपड़ा पहनते देखोगी उसके मुकाबले ये कुछ नहीं है। घबराओ नहीं, तुम इन सबकी आदि हो जाओगी। अब सो जाओ। माँ ने एक हाथ से गाऊन से अपनी चूची को ढकने की कोशिश की और दूसरे से जाँघों के पास के खुले हुए गाऊन को साथ कर के पकड़ा, और कम्बल में घुस कर सो गई।

सुबह ट्रेन दिल्ली पहुँची और मैं और माँ एक होटल पहुंचे जहाँ पहले से आरक्षण करवा रखा था, लेकिन उसने १ हफ्ते का सिर्फ़ १ बेड का आरक्षण करवाया था कि दोनों को साथ सोने और करीब आने का मौका भी मिलेगा।

होटल देख कर माँ की आँखें चौंधिया गई। लेकिन सबसे पहले वो नहाना चाहती थी, सिर्फ़ नहाना ही नहीं, अपने जलते बदन को ठंडा करना चाहती थी। गाँव से चले उसे पूरा १ दिन हो गया था और उसके बदन में जैसे आग लगी थी

माँ को कहा कि सबसे पहले वो उसे एक सैलून ले जा कर उसकी ऐसी काया पलट करवा देगा कि वो ख़ुद को पहचान नहीं पायेगी। और उसके बाद उसके लिए कुछ कपड़े भी खरीदेगा क्योंकि वो कपड़े यहाँ सस्ते मिलेंगे। माँ का साइज़ नापने के लिए एक टेप निकला और माँ को सामने खड़ी होने को बोला और नापने लगा। चूतड़-42, सीना-40, कमर-36 नापने के बहाने कई बार माँ की चूची, चूतड़ और नंगी कमर को भी हलके से छू लिया।

इसके बाद उसने माँ को टैक्सी में सैलून ले जा कर उसके बाल ठीक कराये, और फेशियल करवा के उसका चेहरा और चमकने लगा। वापस टैक्सी में बैठते ही माँ को बाँहों में भर कर उसके गाल चूम लिए और बोला- माँ तू तो क्या मस्त सुंदर लग रही है !

माँ को मेरे इस तरह करना अच्छा ही लगा, लेकिन उसने मेरे को इशारा किया कि टैक्सी वाला शीशे में देख रहा है। फ़िर टैक्सी से माँ को एक मॉल ले गया और माँ के लिए १ सलवार-कमीज़, १ स्कर्ट -ब्लाउज, और २ जींस-टॉप माँ के आकार के ख़रीदे। इसके बाद उसने माँ के लिए २ ऊंची ऐड़ी के सैंडल, और कई नकली सोने के माडर्न दिखने वाले कानों की बालियाँ, गले के हार और चूड़ियाँ आदि बहुत कुछ खरीदा और दोनों लौट कर होटल आ गए।

अपने ऊपर इतना खर्च करते देख कर माँ ऐहसान में डूबती गई। टैक्सी में एक बार माँ ने कहा भी कि उस पर इतना खर्च करने की क्या जरूरत है तो माँ की जांघ पर हाथ मार कर कहा- माँ तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ मैं !

मैं हमेशा माँ को छूने या पकड़ने का मौका कभी नहीं चूकता था, गाड़ी से उतरते, या किसी सीढ़ी पर चढ़ते, उतरते वो कभी माँ का हाथ तो कभी बांह पकड़ लेता था। कभी उसकी कमर पर हाथ रख देता था तो कभी हल्के से माँ के गांड पर इस तरह से छू लेता था जैसे अनजाने में हाथ लग गया हो।

होटल आ कर उसने माँ को कपड़े पहन कर देखने के लिए कहा। शुरूआत हुई सलवार-कुर्ते से, और फ़िर स्कर्ट-ब्लाऊज़। दोनों बिल्कुल ठीक थे। जब माँ जींस पहन कर आई तो माँ के गांड का सेक्सी फ़िटिन्ग देख कर लण्ड में हरकत होने लगी, लेकिन माँ ने कहा कि वो बड़ा कसा लग रहा है उसे।

मैं ने समझाया कि माँ यह जींस ऐसी ही होती है कि उभार ठीक से दिख सकें, और तुम्हारे तो हैं भी इतने सुन्दर !

यह कहते हुए माँ के गांड पर हाथ रख कर उसकी गोलाइयों को एक बार सहला दिया और कहा कि पहनने लगोगी तो अच्छा लगने लगेगा। इस तरह करने पर माँ थोड़ी चौंकी, लेकिन जब तक वो कुछ सोचती, मैं ने उसकी कमर पकड़ कर अपने सामने कर उसकी चूत की ओर नज़र डाली और कहा- वाह ! क्या फ़िट बैठी है यहाँ सामने भी !मैं ने जानबूझ कर माँ के लिए पैंटी नहीं खरीदी और माँ ने कभी पैंटी कभी पहनी भी नहीं थी तो उसे यह मालूम नहीं था कि पैंटी पहनना जरूरी है।

हाँ ! मॉल में उसने अच्छी अच्छी ब्रा देखी थी लेकिन शर्म के मारे वो ब्रा के लिए कह नहीं पाई।

माँ ने पूछा- आज कितना खर्चा हुआ?

तो जब सारा खर्च बताया तो माँ ने कहा कि टैक्सी की जगह हम लोग बस में नहीं ज सकते क्या?

मैंने कहा कि हाँ, पैसे तो बचेंगे, लेकिन भीड़ में थोड़ी परेशानी होगी तुम्हें।

माँ ने कहा कि जैसे इतने सारे लोग बस लेते हैं, हम भी ले लेंगे।

इसके बाद सोने की तैयारी करने लगे। माँ ने अपना नाईट-गाऊन पहना और राहुल पायज़ामा-बनियान में।

लेकिन आज़ माँ नाईट-गाऊन पहनने में नहीं शरमा रही थी जबकि उसकी चूचियों उभार और उसकी नंगी जांघें दिख रही थी। यही नहीं, जब वो बाथरूम से नाईट-गाऊन पहन कर निकली तो पीछे से रोशनी होने की वज़ह से उसका शरीर करीब करीब नंगा ही लग रहा था। रात भर माँ बेटे होटल में साथ सोए और मैंने माँ के ऊपर कई बार हाथ भी रखा, लेकिन इसके अलावा और कुछ नहीं हुआ।

दूसरे दिन साथ बस से दिल्ली घूमने निकले। माँ ने सलवार-कुर्ता पहना था। पहली बार ही बस में चढ़ते हुए वो समझ गई कि क्यों बोल रहा था कि भीड़ भाड़ में मुश्किल होती है बस में। वो चारों ओर से मर्दों से घिरी हुई थी। कई लोगों के हाथ उसने अपने चूची और गांड पर महसूस किए। कुछ लोगों ने कमला के गांड की दरार में अपना लण्ड रगड़ा। कई तो सिर्फ़ एक दो बार छू या दबा कर वहाँ से खिसक जाते थे, लेकिन कई तो ऐसे निडर थे कि हाथ हटाने का नाम नहीं लेते थे।

एक ने जब ऐसा किया तो माँ पूरा घूम गई, लेकिन तब उसने माँ की जांघों के बीच उसकी चूत पर ही हाथ रख दिया। थोड़ा घबरा गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे।

मैं पास ही खड़ायह सब देख रहा था। मैंने एक सीट के पास थोड़ी जगह बनाई और कहा- आप यहाँ बगल में आ जाओ। कम से कम वो चारों ओर से लोगों से घिरी नहीं थी। उसने एक हाथ से ऊपर का डण्डा पकड़ा और दूसरे हाथ से सीट को। अब भी उसके पीछे खड़े और आते जाते लोगों का हाथ वो कभी कभी अपने गांड पर महसूस कर रही थी। अब उसे डर या इतना बुरा नहीं लग रहा था।

लेकिन तभी उसे लगा कि सामने से कोई हाथ बड़े हल्के से सलवार के ऊपर से उसकी जांघ सहला रहा है। उसे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि वो हाथ किनारे वाली सीट पर बैठे एक लड़के का था।

हे भगवान ! आजकल इस उम्र के लड़के भी ऐसे बेधड़क हो गए हैं ! सोचा कि देखें यह लड़का किस हद तक बढ़ता है और वो उसकी उंगलियों की हरकत को अपनी जांघों पर महसूस कर रही थी लेकिन बस की खिड़की के बाहर ऐसे देख रही थी जैसे बिल्कुल बेखबर हो। उस लड़के की उँगलियाँ माँ की जाँघों पर सलवार के ऊपर धीरे धीरे ऊपर रेंगने लगी और ऐसे लगा जैसे उसकी दोनों जाँघों से उसकी चूत तक कोई करंट मार रहा हो और उसकी चूत गीली होने लगी। उस हिम्मती लड़के ने आख़िर चूत पर अपनी हथेली रख दी और धीरे धीरे मसलने लगा। माँ ने अपनी टांगों को और थोड़ा खोल लिया जिससे लड़के को अपना काम करने में आसानी हो। उसका सर हल्का होने लगा, वो झड़ना चाहती थी, इसी बस में लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बस रुकी और वो लड़का सीट से उठा, उसका स्टाप आ गया था। लेकिन जाते हुए उसने कहा- आंटी ! मेरा नाम अनिल है, कल सलवार की सिलाई खोल कर आना तो और मजा दूँगा !

माँ को अब तक लग नहीं रहा था कि वो इस दुनिया में थी, लेकिन लड़के की ऐसी बात सुन कर एकाएक चौंक कर फिर वापिस इस दुनिया में आ गई और उस लड़के की खाली की हुई सीट पर बैठ गई। कमला को ये नहीं मालूम था कि मैं बस में दूर था लेकिन वो साथ की सारी हरकतें गौर से देख रहा था।

थोड़ी देर के बाद मैं उसके पास आया और बोला कि उनका भी स्टाप आ गया है। वो दोनों होटल के पास बस से उतर गए। बस में इतने लोगों के उसके अंग अंग के साथ खेलने से माँ के बदन में आग लग गई थी। उसे सिर्फ़ लण्ड चाहिए था, किसी का लण्ड।

होटल आते ही वो नहाने के बहाने बाथरूम भागी और ऊँगली से अपने को झाड़ा और आकर बिस्तर पर मेरी ओर अपने चूतड़ कर के सो गई। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। और उसके अन्दर मन में एक गुदगुदी सी हो रही थी। वो चित्त लेटा था, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अपनी माँ की ओर घूम कर माँ से सट गया और अपना एक हाथ माँ के ऊपर इस तरह रखा कि उसकी उंगलियाँ चूची को छूने लगी। मैं ने इस हरकत को इस तरह किया जैसे नींद में हो।

माँ ने नाईट-गाऊन की बेल्ट नहीं बांधी थी इसलिए वो सामने से बिल्कुल नंगी ही थी। सीना पीठ से सटा हुआ था और उसकी जांघ अपनी मां के गांड से। मेरे हाथ से नींद में फ़िर हरकत हुई और चूची की घुण्डियों को हल्के से रगड़ते हुए उसका हाथ नाभि और चूत के ऊपर आकर ठहर गया। लेकिन उसके बाद मेरी हाथों में कोई हरकत नहीं हुई तो माँ ने सोचा कि की नींद में ऐसा कर रहा है।

ऐसा करने के साथ अपनी जांघें माँ के गांड से इतनी सटा दी कि उसका लण्ड गांड को छू गया। माँ को फिर अपनी चूत में ऊँगली डाल कर झड़ने की इच्छा हुई, लेकिन उसके दोनों जांघ सटे हुए थे और मेरे हाथ उसके पेट पर इस तरह था कि वो अभी ऐसा नहीं कर सकती थी। वो अगर चित्त हो जाए तो दोनों टांग खोल कर वो ऊँगली कर सकती थी। लेकिन जब वो चित्त हुई तो मेरे हाथ खिसक कर उसकी नंगी चूत के ऊपर बाल पर आ गए।

अपने चूत की जलन चुदासी माँ नहीं सहन कर पाई और सारी लाज और शर्म छोड़ कर, दोनों टांग फैला कर अपनी ऊँगली से चूत के दाने को सहलाने लगी, और कभी कभी ऊँगली को चूत के अन्दर बाहर करने लगी। मेरे से भी नहीं रहा गया। अपनी माँ को ऊँगली करते देख वोह चित्त हो गया और बेधड़क एक हाथ से अपनी माँ का हाथ उसकी चूत से हटा कर अपने लण्ड खड़े फनफनाते लण्ड पर रखा, और दूसरे हाथ की हथेली को माँ की चूत पर रखा।

दोनों अब समझ गए कि वो एक दूसरे के साथ क्या करना चाहते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। एक ओर मैं माँ की गीली चूत के दाने को सहलाने लगा, साथ ही माँ धीरे धीरे लण्ड को जड़ से टोपी तक सहला कर उसके लण्ड की लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने लगी।

हे भगवन, क्या लण्ड दिया तूने मेरे बेटे को, ७ से ८ इंच का लगा उसे। माँ ने सिर्फ़ जमुना लाल जी का ५ इंच के लण्ड का स्वाद लिया था और उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि लण्ड इतना लंबा मोटा भी होता है।

मैं ने सोचा कि अब लोहा गरम हो चुका है और वो घड़ी आ गई है जिसका इंतज़ार था। वो उठा और पजामे को उतार फेंका और नीचे से बिल्कुल नंगा हो कर अपनी माँ की टांगों को बेड के किनारे तक इस तरह खींचा कि उसकी माँ की गांड बेड के किनारे आ गई। इसके जवाब में अपनी टांगें जितनी खुल सकती थी खोल कर फैला दी। अब माँ की गरम और रसीली चूत की दरार में अपना सुपाड़ा रख कर हलके से दबाया। उसका लण्ड २ इंच माँ की चूत के अन्दर घुस गया। तब उसने माँ के दोनों मांसल गांड के नीचे दोनों हाथ रख एक जोर दार धक्का लगाया। घच की आवाज के साथ पूरा लण्ड जड़ तक अपनी माँ की चूत में चला गया ,अब घच घच अपनी माँ की चूत को चोदना शुरू किया और आनंद से उसकी माँ बड़बड़ा रही थी– चोदो मेरे लाल, चोदो आज अपनी चुदासी माँ को ! कई साल से भूखी है तुम्हारी माँ ! आज सारी भूख मिटा दो !

माँ को घच घच चोदते हुए बोल रहा था- ये ले, और ले माँ। तुम्हारी सालों की चुदाई की कसर अब पूरी हो जायेगी। चोदने के साथ माँ की चूचियां बेरहमी से मसल रहा था और माँ के मुंह और गले को चूम रहा था। माँ भी अब नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर धक्के का जवाब देने लगी। लगता था कि कमरे में भूचाल आ गया हो।

और उसके ५ -७ करारे धक्के लगाते ही उसकी माँ झड़ने लगी। । तभी लण्ड से उसके रस की १०-१२ पिचकारी छूटी और चूत के हर कोने को रसदार कर दिया . अपनी माँ की चूत में लण्ड डाले हुए उसके ऊपर पड़ा रहा।

कमला को बड़ा आश्चर्य हुआ कि झड़ने के बाद भी राहुल का लण्ड पूरा ढीला नही हुआ। वास्तव में १५ मिनट के बाद उसे लगा कि लण्ड उसकी चूत में धीरे धीरे फड़क रहा है और फिर से लोहे की तरह कड़ा होता जा रहा है। माँ भी फिर से चुदाने के लिए तैयार थी, लेकिन बिस्तर से उठ कर बिजली जलाई और अपनी मस्त नंगी माँ का हाथ पकड़ बिस्तर से उठाया और कहा - अभी तो शुरुआत हुई है, अभी देखो रात भर क्या करता हूँ।



रात की तीसरी चुदाई में माँ को कुटिया जैसी बना कर पीछे से चोदा। माँ आज तक कभी पीछे से ऐसे नहीं चुदी थी, लेकिन उसे लगा कि ऐसे में लण्ड और गहराई तक जाता है।
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Posted by rehankumar
4 years ago    Views: 45,303
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3 years ago
good 1
4 years ago
good story; pls post more storyes