गांव का बगीचा (यादें -१ )

ये मेरे जीवन के कुछ यादगार बातें हैं, जिन्हे मैं अक्सर याद करके अपने पुराने अतीत को अपने मन में ताजा कर लेती हूँ. ये वो पुरानी यादें हैं जिन्हे मैं अपने दिल में हमेशा ताजा रखना चाहती हूँ. इन बातों में से कुछ बातें मैं आपसे भी बाँटना चाहती हूँ.
मैं गांव की रहने वाली हूँ. एक किसान के बेटी हूँ. गांव में पैदा हुई. गांव में खेली, गांव में घुमी और गांव में बड़ी हुई. इसलिए मेरी खून और रोवें में गांव की खुशबू महकती रहती है.
ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी. लेकिन मैं जवान हो चुकी थी. मेरे गांव के बगल में ही एक बगीचा है. जिसमे मैं जब छोटी थी तो खेलने जाती थी. बगीचा बड़ा था और बगीचे के चारो ओर सरपत का घना जंगल उगा था. दिन में भी दर लगता था. बगीचे के बीच में एक कुंवा था. जिसके बगल में एक आप का बड़ा पेड़ था और उस पेड़ के निचे ही एक पक्का पत्थर के पटिये का चबूतरा बना था. जिसपर लोग कुँवें से पानी निकाल कर नहाते और कपडे धोते थे. लेकिन कुँवा अब सुख चूका था. इसलिए बगीचे में किसी का आना जाना नहीं था. कुंवे के बगल में बने उस चबूतरे के पर दिन में काफी छाया रहती थी और गर्मी के दिन में गांव की औरतें उस चबूतरे पर बैठ कर काफी गप्प शप करती थीं. वह जगह काफी सुनसान थी. मैं भी दिन में बगीचे में ही घुमा करती थी. मुझे याद है की जब तक मैं बच्ची थी तबतक मैं उस बगीचे में खूब जाया करती थी. लेकिन जैसे ही जवान हुई, माँ मुझे उस बगीचे में जाने से मना करने लगी. लेकिन मैं उस बगीचे में जाये बगैर नहीं मानती थी. जवान होने के साथ मेरी सूझ बुझ भी बढ़ गई. जब मैं बच्ची थी तब मैं उस बगीचे में खेलने में मगन रहती थी. लेकिन जब जवान हुई तब खेलने के बजाय मैं अपनी सहेलिओं के साथ उस चबूतरे पर बैठती और सहेलिओं की रंगीन बातें सुनने में मस्त रहती थी. मैं उन्ही बातों को आपसे बाँटना चाहती हूँ. एक्स हम्सटर पर मिले प्राइवेसी के कारण मैं आपसे कुछ रंगीन यादें बाँट पा रही हूँ.
मेरे घर के अगल बगल मेरी उम्र की कई लड़कियां थीं. लेकिन उनमे से कुछ मेरी खास सहेलियां थीं. जिनमे एक सहेली रीना थी. वो उम्र में मुझसे २-३ साल बड़ी थी. लेकिन उससे मेरी खूब पटती थी. उस समय उसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन उसके ससुराल वाले उसे छोड़ दिए थे. शादी के दो महीने में ही वो वापस नैहर आ गई थी. मुझे याद है रीना को जब उसके ससुराल वाले भगा दिए थे तब रीना के घर वाले उसके ससुराल जा कर खूब झगड़ा किये थे. लेकिन वो सब रीना को ले जाने से मन कर दिए. उस समय मैं जवान हो चुकी थी. रीना जब गांव में रहने लगी थी तब दोपहर को अक्सर उस बगीचे में आती थी. मेरी खास सहेली होने से मैं भी उसके साथ ही रहती थी. मुझे याद है की जब रीना गांव में कहीं जाती थी तो गांव की कोई औरत गंवई ठेठ भाषा में एक ही सवाल पूछती ".. रीना रे .. तोके काहें ससुरा वाले छोड़ देहिन...?" रीना काफी साहसी किस्म की थी. वो भी जबाव तुरंत दे देती "... ससुरा वाले सब हरामी हैयन.... मोहे खुद नहीं पसंद हौ ससुराल.... अब मो खुद न जाइब ससुरा...." इस पर कोई पूछता " कैसे हरामी हउवन रे .... का करें तोरे साथ.... " तब रीना चुप रहती,
मेरे गांव में जमुनिया चाची रहती हैं, जिनकी उम्र उस समय ४० साल के आसपास थी. वह मिजाज़ से काफी मजाकिया किस्म की थीं. अक्सर फ़ूहड़ बात करती थीं. गांव के मर्दों से भी खूब बातें करती थीं. लेकिन मेरी माँ से जमुनिया चाची से नहीं पटती थी. मुझे नहीं मालूम किसी बात को ले कर मेरी माँ और जमुनिया चाची के बीच झगड़ा हुआ था. लेकिन मुझे जब जमुनिया चाची इधर उधर देखती थीं तो बातें करती थीं. रीना की माँ से जमुनिया चाची का खूब बनता था. अक्सर मैं रीना के घर जमुनिया चाची को रीना की माँ से बात करते देखती थी. रीना का ससुराल से वापस आना जमुनिया चाची को भी एक पहेली की तरह थी. इसीलिए एक दिन जमुनिया चाची अकेले में मेरे सामने ही रीना से ससुराल से वापस आने की बात जब कुरेद कुरेद कर पूछी तब रीना बोली "... चाची... कोई से कहया मत... ससुरा वाले शक करेलेन...."
जमुनिया चाची: "का शक करेलेन रे ...... का कहेलेन तोके... बताव ... हम कोई के न बताइब..."
रीना: "... चाची .. उ ...कहेलेन की तैं हरामी हेई..... "
जमुनिअ चाची: " के कहे रे हरामी .... तोके ...?"
रीना: " मोरे मर्दा..... और सास.."
जमुनिया चाची: "...कैसे तोके कहेलेन ....कैसे ओके मालूम रे कि ... तैं हरामी हेई ..., लागत हौ कोई गांव के आदमी तोरे मरदा के दिमाग में भर देले बा...."
रीना: "हाँ चाची .... मोर माई भी ...इहे कहत रहे....... कि कौनो झूठे बेइज़्ज़त करत हौ.... "
जमुनिया चाची: " ... तैं ससुरा जाबी .... कि नाही..."
रीना: "... लिया जइहन तो चल जाब ... "
जमुनिया चाची: ".... चिंता मत करे..... नैहर में रहू .... नैहर के मज़ा लूट.... " यह कह कर जमुनिया चाची हंसने लगी. रीना भी मुस्कुराने लगी और अपनी नज़र निचे कर ली.
जमुनिया चाची: ".... रे...रिनवा..... तैं खूब मज़ा लूट नैहर में... और अपने मर्दा के मुठ मारेदे..... चार साल जब मुठ मारी तब ओके मालूम चले कि ..... छेद का होवत है ...."
रीना यह सुनकर मुंह निचे करके हंसने लगी और मैं भी बात समझ रही थी. मुझे भी जमुनिया चाची की बात सुनकर लाज आ गई और मैं भी अपनी मुंह दूसरे और फेर ली. दोपहर के वक्त बगीचे में कोई नहीं था. रीना चुप ही रही तभी जमुनिया चाची बोली
जमुनिया चाची: "... रे रिनवा.... एक बात बताव .... उ ... भक्कन वा के लगे जाली की नाही...."
रीना: "धत्त .... चाची .... का बोलेलु.... उल्टा सीधा.... "
जमुनिया चाची : ".... मोसे का छिपावत है तैं .... मोहे सब मालूम हौ...की भक्कनवा तोके केतना दिन से तोर फैलावत हौ.... चल बताव... ससुरा से अइले के बाद भक्कनवा से आपन कुंचवाइली कि नाही .... "
रीना: ".. चाची ....तू आपन कुचवाला ......."
जमुनिया चाची: " मोर तो ना जाने केतना कुचायल है रे... भक्कनवा बहुत कुचले हौ ..... अब्बौ जब मौका मिली तब आ के कूंच लेला.... लेकिन अब तोर ज्यादे मज़ा देला मरदन के ....भक्कनवा भी कहत रहल..... की रिनवा के बहुत मज़ा देला..."
रीना: ".. हे चाची.... तू एकदम लाज खत्म कर देलू.....इ सब मत बोला ..."
जमुनिया चाची : "... अब लाज कहे के रे.... जब तोके मरद छोड़ देलस ... तब तहुँ मज़ा ले अपनी उमर के.... खूब कुंचवाव नैहर में .... तोरे पीछे तो कुल मरद पड़ जइहन रे.... बड़ी चढ़ल जवानी हौ तोर..."
(Continue...)

100% (4/0)
 
Categories: First TimeMature
Posted by raagini
6 months ago    Views: 177
Comments (4)
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4 months ago
khubsurat shuruwat.....
6 months ago
aapki kahani ka jawab nahi
6 months ago
tumhara likhnee taakat hai !!! tum likhnaa maat chodo , aaur baat baadmee baataingee
6 months ago
chalu rakho raagini