शीला भौजी के जेठ जी

उस समय मेरी शादी नहीं हुई थी. मैं जवान हो चुकी थी. गांव में मेरे घर से दो घर के बाद शीला भौजी का घर था. मैं अक्सर अपनी सहेलिओं के साथ उनके घर जाती थी. जब भी समय मिलता, मैं उनके घर पहुँच जाती थी. मेरी माँ भी जानती थी कि मैं शीला भौजी के घर अक्सर जाती हूँ. शीला भौजी के घर में उनके जेठ के अलावा ससुर और और सास थीं. उनका एक तीन साल का लड़का था. शीला भौजी के पति गांव पर नहीं रहते थे बल्कि दूर शहर कमाने गए थे. शीला भौजी के जेठ जी का अपनी पत्नी से काफी लड़ाई झगड़ा होता था और उनकी सास से भी नहीं पटती थी. इसलिए शीला भौजी का जेठान अपने मायके ही रहती थीं. शीला भौजी जो उस समय करीब २८-३० साल की थीं, मुझे बहुत मानती थीं. कहती थीं "रागिनी तुम जिस दिन नहीं आती मेरा मन नहीं लगता " मैं भी शीला भौजी के घर सुबह शाम दोपहर , जब मौका मिलता चली जाती.
एक दिन दोपहर के वक्त मैं जब पहुंची तो उनके घर का बाहर वाला दरवाजा बंद था. मैं सोच में पड़ गई. क्योंकि बाहर वाला दरवाजा बंद नहीं होता था. जब कभी भौजी आँगन में नहाती थीं तभी बंद होता था. मुझे लगा की भौजी नहा रही होंगी. लेकिन दोपहर की तेज धूप में आँगन में भला कैसे नहा रही हैं यही सोच कर मैंने उनके घर के बाहर वाले पुराने दरवाजे में कोई छोटा सुराख़ तलाश की और अंदर देखी आँगन के बीच में लगे हैंडपम्प के पास भौजी नहीं थी, कोई कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. तब मुझे लगा की भौजी दोपहर में सो गई होंगी. यही सोच कर मैं वापस जाने की सोची लेकिन तभी मैंने दरवाजे के सिटकनी खटखटा दी और अपनी आँख को उसी सुराख़ में लगाये आँगन में देखती रही. तभी मैं देखी दरवाजे की खट खटाहट से एक कमरे से उनके जेठ जी एकदम नंगे ही बाहर निकले उनका लण्ड खड़ा था और दूसरे हाथ में एक तौलिया थी जिससे वो अपने लण्ड पर लगे सफ़ेद पानी को तेजी पोंछते हुए अपने लुंगी को कमर में लपेट कर दरवाजे की और आ रहे थे. इतना देखकर मैं डर गई. जी में आया भाग जाऊं. अभी कुछ सोच पति की तुरंत दरवाजे को खोल कर बोले " कौन .... अरी तू है रागिनी.... दोपहर को कहाँ घूम रही है.....? " लुंगी में खड़े शीला भौजी के जेठ जी के सवाल का जबाव देने में हालत खराब हो गई थी. मैं कुछ भी नहीं बोल पाई. तभी शीला भौजी के जेठ जी पूछे "... कोई काम है का री..... " तब मैं बोली ".. नाही ...बस ऐसे भौजी से मिलने आई थी..." तब शीला भौजी की जेठ जी दरवाजे पर खड़े थे लेकिन अंदर जाने के लिए नहीं बोले और मुझे देखते हुए एक पल अंदर उस कमरे की और देखे जिस कमरे से बाहर आये थे. और फिर बोले "... तेरी भौजी नहीं है... यहाँ कोई नहीं है..... जाओ बाद में आना ...... " यह सुनकर मैं चौंक गई और उस कमरे की और देखने लगी. मुझे एक पल ऐसा लगा मानो उस कमरे को हलचल हो रही हो. लेकिन मैं डर चुकी थी. शीला भौजी अक्सर कहीं जाती नहीं थी. तो आज कहाँ जा सकती हैं. यही सोच कर वापस जाने लगी तभी शीला भौजी के जेठ जी बोले "... जाओ.... बाद में आना ..... जाओ..." इतना सुनते ही मैं तेजी से अपनी नज़र झुकाये वहां से चल पड़ी. दोपहर के वक्त मुझे ऐसा लग रहा था की शीला भौजी अंदर ही थीं और उनके जेठ जी झूठ बोल रहे थे. मन में डर समा चुकी थी. सुराख ले जो लण्ड देखी थी उसी के बारे में सोचते हुए मैं अपने एक सहेली नीलू के घर पहुँच गई. उसका घर शीला भौजी के घर के बगल में ही था. उसके घर पहुंची तो उसके घर का दरवाजा खुला था. घर के अंदर एकदम सन्नाटा था. मैं इधर उधर देखी कहीं कोई दिखाई नहीं दे रहा था. तभी एक कमरे में नीलू की माँ मुंह बाए सो रही थी. एकदम से गहरी नींद में . मैं उन्हें जगा कर पूछी "चाची ... नीलू नहीं है का...." तब नीलू की माँ अपनी लाल लाल आँख मलते हुए बोली "... नाही री... रागिनी ....अरी... वो कहीं गई होगी... घूमने .... जाओ देखो... कहीं गई है..." इतना कह कर फिर सो गई. तब मैं वहां से मायूस हो कर अपने घर धीमे धीमे क़दमों से चल पड़ी. दोपहर के सन्नाटे में मैं देखी कि शीला भौजी के घर से नीलू तेजी से निकली और अपनी नजरें झुकाये तेजी से अपने घर जाने के बजाय दूसरी और जाने लगी. मैं सोची कि आवाज दूँ, लेकिन मैं भी बिना कुछ बोले उसके पीछे चल पड़ी. मैं तो उसे शीला भौजी के घर से निकलते देखी लेकिन वो मुझे नहीं देख पायी थी. मैं काफी अचरज में थी. क्योंकि शीला भौजी के जेठ जी जिस हालत में मिले थे और उसके तुरंत बाद नीलू को घर से बाहर आने वाली बात से मैं एकदम से दर गई थी. मैं उस समय इतना जवान जरूर थी कि इन बातों को समझ गई कि शीला भौजी के जेठ जी नीलू के साथ क्या किये होंगे. या दोपहर के वक्त शीला भौजी के घर में नीलू क्या करने गई थी. क्योंकि शीला भौजी का घर मेरे घर के बगल में ही था इसलिए मैं भी रोज जाती थी और उनके जेठ जी भी मुझे कई बार इशारा कर चुके थे लेकिन मैं उस समय उनकी इशारे को नजरअंदाज कर चुकी थी.
मैं देखी की नीलू शीला भौजी के घर निकल कर काफी तेजी से मेरे घर की ओर चल पड़ी. उसके पीछे पीछे मैं भी अपने घर के आँगन में आ गई जहां नीलू मुझे सामने देखते ही हकबका गई. फिर मैं पूछी "तू कहाँ गई थी .... " यह सुनकर नीलू तुरंत बोली "कहीं तो नहीं... अभी तो मैं अपने घर से आ रही हूँ ... तुझसे ही मिलने ..." इतना सुनकर मैं सन्न रह गई. मैं नीलू से और कुछ नहीं पूछी बल्कि सोच में पड़ गई की आखिर शीला भौजी के घर में जेठ जी ने नीलू के साथ क्या किया होगा. मुझे कुछ गहरी सोच में देख कर नीलू बोली "... क्या सोच रही है ... तुम्हारी माँ नहीं है क्या .. " इसपर मैं बोली ".. नहीं कही गई होगी..." नीलू फिर मेरे घर दीवाल में लगे सीसे के सामने खड़ी हो कर अपने उलझे बालों को तेजी से ठीक करने लगी और दूसरे ही पल मुझसे बिना कुछ बोले तेजी से भाग गई. मैं उसके पीछे पीछे जा कर देखी तो वो शीला भौजी के घर के सामने से गुजर रही थी और शीला भौजी के जेठ जी वहीँ खड़े हो कर उसे देख कर मुस्कुरा रहे थे. फिर उससे इशारे में कुछ कहे तो वो हंस कर बोली "ठीक है ... " और अपने घर की ओर भाग गई.
शाम को शीला भौजी बाजार से आ चुकी थीं. मैं जब उनके घर गई तो शीला भौजी के जेठ जी घर पे नहीं थे और ना ही सास. मेरे मन में दोपहर की घटना हर पल उभर कर आ रही थी. तभी शीला भौजी से मैं पुछि " भौजी . कहाँ गई थी आप " यह सुनकर शीला भौजी बोली "बाजार गई थी री..... सोची तुझे भी ले चलूँ... चल अगले हफ्ते तू मेरे साथ चलना ... सासु माँ बाजार नहीं जाना चाहती हैं... थक जाती हैं .."
तभी शीला भौजी के जेठ जी आ गए तब शीला भौजी अपने सर पर साड़ी का पल्लू रखते हुए कड़ी हो गईं. जेठ जी ने कुछ मीठी आवाज में पूछा "बाजार से हो आई ... ?" तब शीला भौजी बोली " हाँ... "
तभी शीला भौजी अपने जेठ जी की और देखते हुए धीमे से पूछी " वो...काम हो गया... " यह सुनकर जेठ जी मुस्कुरा कर दूसरी और देखते हुए बोले " हां रे.... आई थी ... काम पूरा हो गया... " यह सुनकर शीला भौजी मुस्कुरा कर रह गई. मैं कुछ भी समझ नहीं पाई. फिर कुछ पल दोनों चुप रहे. फिर शीला भौजी धीमे से बोली "आधा अधूरा तो नहीं छोड़ दिए बेचारी को...." तब शीला भौजी के जेठ जी धीमे से बोले ".. तू भी क्या बात करती है .... वो दो बार बह गई..." अभी तक मैं इन बातों को समझ नहीं पा रही थी. फिर शीला भौजी धीमे से बोली "... खुद कितनी बार..." जेठ जी ने जबाव में धीमे से बोले "एक बार... "
---continue----......!
100% (7/0)
 
Categories: Mature
Posted by raagini
6 months ago    Views: 224
Comments (3)
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6 months ago
please post part 2,achee shuruat hai
6 months ago
Aah Ragini ji aap ki lekhan sheilee kee daad detaa houn
kya sundar likhtee hein aap
aur itney sundar modd par laa kar kahani ko roka hei
ab is key agley adhyay ki pratiksha rahegi
6 months ago
Ati sunder
Bhabhi ji...