Panchar wale se gand marwai part two

पंचर बनाने वाले से गांड मरवाई २
आपने मेरे इस सत्य घटना के पहले भाग में पढ़ा की किस तरह मैंने योजना बनाकर पंचर वाले की गांड मारी, अब मैंने उससे कैसे गांड मरवाई ये सुने और अगर मेरी कहानी आपको जरा भी सत्य लगे और पसंद आये तो जरुर मेल करे मुझे अपने पाठकों के मेल का इंतजार रहता है आशा है की गुरु जी मेरी कहानियो को भी अपनी इस हिंदी प्रेमी साईट पे स्थान देते रहेंगे.
जब मैंने पंचर वाले की गांड मरी और रात ४ बजे बिलकुल भीगा हुआ घर पंहुचा तो बीबी ने पुचा “ इतनी देर कैसे लग गई , मैंने कहा की “ एक तो रात में ये बारिश और ऊपर से गाड़ी पंचर हो गई जो ५ किलो मीटर खीचनी पड़ी उसकी वजह से शुकर मनाओ एक बंदे ने इतनी बारिश में पंचर बना दिया तो मै आ भी गया वर्ना वाही से सुबह फिर काम पे जाना पड़ जाता” ये सुनकर उसको थोड़ी तसल्ली हुई और उसने फटा फट एक कप चाय बनाकर दी और खाने के लिए दिया , मैंने भी जल्दी जल्दी खाना निपटाया और अपनी बीबी को बाहों में लपेटकर सो गया !
अगले दिन मै फिर उसी रस्ते से होता हुआ अपने काम पे गया जाते समय देखा की वो पंचर वाला लड़का किसी ट्रक का टायर बना रहा था उसने मुझे जाते नहीं देखा , इसी तरह कई दिन बिट गए मै रोज उधर से निकलता था पर रुकने का टाइम नहीं मिला क्यों काम पे जाते समय जल्दी होती थी और लौटते समय देर होती थी , पर एक वीक के बाद एक रात जब मै लौट रहा था तो फिर दिल हुआ चलो आज थोड़ी मस्ती हो जाये कम से कम लंड ही चूस लू या चुसवा लू ! मैंने उसकी दुकान के सामने अपनी बाइक रोकी उसने जैसे ही मुझे देखा दौड कर मेरे पास आया और बोला “बाबूजी उस दिन के बाद आज दिखाई देये हो आप तो कह रहे थे की रोज निकलता हू यहाँ से पर मैंने कभी नहीं देखा” मै बोला “यार अहमद, तुमने नहीं देखा पर मै तो रोज तुम्हे देखता हू , जब जाता हू तो तुम कुछ न कुछ काम में लगे होते हो ,और जब लौटता हू तो रात हो जाती है मै भी काम की वजह से थका होता हू ,तुम्हे देखते हुए निकल जाता हू, आज बड़ा मन हुआ की तुम्हारे साथ बैठ कर चाय पीऊ, तो रुक गया और बोला जाओ चाय ले आओ दोनों लोग पीते है” कह कर उसको एक पचास का नोट दिया वो लेकर चला गया और चाय ले आया! बाकि पैसे मैंने उसको ही दे दिए की तुम रख लो बाद में और चाय पी लेना, उसने बचे हुए पैसे जेब में डाले और चाय पीने लगा! इसी बिच मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा क्या आज खाली हाथ जाऊंगा दोस्त कुछ मजे नहीं लेंगे हमलोग तो वो हंसा और बोला बाबूजी आज तो आपकी बारी है मुझे खुश करने की, मैंने कहा “ भाई तुम अपने मन की कर लो जो चाहो ,मै तुम्हारे सामने खड़ा हू पर यहाँ कैसे हो पायेगा अभी तो ढाबे में भी भीड़ है और इस समय तुम्हारी दुकान पे कोई भी आ सकता है ,यहाँ किस तरह हमलोग मजे करेंगे” वो बोला “बाबूजी उस दिन की तरह तो मजे नहीं कर पाएंगे पर अगर आप चाहो तो पीछे खेत है उधर चलते है और १० या १५ मिनिट में निपट कर आ जायेंगे” मुझे कोई आपत्ति नहीं थी मै तो रुका ही इसीलिए था , उसने एक बोतल उठाई उसमे पानी भरा और बोला “बाबूजी मै जा रहा हू आप भी ६ मिनिट के बाद उधर आ जाना” उसके जाने के बाद मै भी खेतों की तरफ चल पड़ा और लगभग १०० मीटर जाने के बाद उसने मुझे आवाज़ लगाई तो मै उसकी तरफ चला गया, वह पे एक बाग था उसने एक पेड़ के निचे अपनी लुंगी बिछाई और अपने सारे कपडे उतर दिए उसका ७” का लंड बिलकुल तीर की तरह सीधा था बिना टोपी का सुपाडा चमक रहा था चांदनी में,मै तुरंत झुका और उसके लंड को अपने मुह में भर लिया और बैठ कर तगड़ी चुसाई शुरू कर दी, वो भी अपनी गांड हिला हिला कर झटके दे दे कर ज्यादा से ज्यदा लंड मेरे मुह में घुसाने की कोशिश कर रहा था, उसने मेरे सर को दोनों हाथो से पकड़ लिया और मेरे मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया , एक बार तो उसने पूरा लंड मेरे मुह में घुसा दिया जिससे मेरा गला चोक हो गया मै संश नहीं ले प् रहा था उसके लंड से हल्का हल्का कामरस भी नकल रहा था जिसका नमकीन स्वाद मुझे भी और गरम कर रहा था कहने की बात नहीं की मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था और मैंने अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मुठी मार रहा था , लगभग ५ मिनिट की चुसाई के बाद वो बोला “बाबूजी अब पैंट और जांघिया निकाल कर पेड़ को पकड़ कर झुक जाओ. उसने जैसा कहा मैंने वैसे ही किया, पर मेरी पहली चुदाई से उसको अच्छा अनुभव हो गया था वो निचे बैठ कर मेरी गांड का छेद चाटने लगा और मेरी गांड भी चाटने से ढीली हो गई थी उसने एक ऊँगली डाल कर देखा की मेरी गांड अब चोदने लायक हुई या नहीं और ढेर सारा थूक अपने मुह से निकल कर अपने लौडे पे लगाया ,फिर उसने मेरी गांड के छेद पे टोपा टीकाकार जोरदार झटका मारा, मेरी तो चीख निकल गई वो घबरा कर बोला “बाबूजी क्या हुआ” मै कहा “ अबे यार तुने इतनी जोर से एक बार में ही पूरा लंड पेल दिया मेरी गांड की ऐसी तैसी हो गई जरा धीरे धीरे करके मजे लो” उसने अब ऐसा ही करना शुरू किया मै एक हाथ से पेड़ पकडे था,और दूसरे हाथ से अपने लौडे को मुठ मार रहा था,वो अपनी चुदाई में लगा था उसके दोनों हाथ मेरी कमर को जोर से पकडे थे , और वो ढाका धक् पूरा लंड टोपे तक निकलता और फिर स गांड में पूरा दबा देता. हमदोनो ही जन्नत का मजा खेतों में ले रहे थे, तभी वो रुक गया और बोला “बाबूजी उस दिन आपने मेरे मॉल को निकाल कर अपने लंड में लगाकर मेरी गांड मारी थी मुझे भी अपना मॉल दो तो मजा आएगा आपकी कासी हुई गांड चोदने में” तो मैंने कहा “ की ठीक है मेरे लंड को चूसकर निकल लो उसके बाद जो मर्जी आये मेरे जूस के साथ करो , वो बोला ठीक है बाबूजी और मै घूम गया उसने मेरा लुंड चूस चूस कर आखिर में सारा मॉल निकल ही लिया और उसे अपने हाथ में थूका और बोला” बाबूजी आज तक मैंने किसी का लंड नहीं चूसा और मॉल तो मैंने अपने लंड का अपने मुह में नहीं लिया पर आपने मुझे पूरा रंडी बना दिया है” कहकर उसने सारा मॉल अपने लंड में लपेटा और मै घूम गया तो उसने कहा “बाबूजी थोडा घोड़ी की तरह झुक जाइये हाथ जमीं पे रख लीजिए तो गांड खुल जायेगी और आपको दिक्कत भी नहीं होगी” मै तुरंत चौपाया हो गया और उसने लंड पकड़ कर फिर से पूरा का पूरा मेरी गांड में उतार दिया, अबकी मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई और मै भी पीछे की तरफ धक्के मरने लगा उसको ये अदा बहुत पसंद आई और उसकी स्पीड बढ़ गई वो तेज तेज धक्के मार रहा था और हम दोनों ही शिष्कारिया ले ले कर चुदाई का परम आनंद ले रहे थे मेरा लंड घंटी की तरह हिल रहा था और उसका पुरे फार्म में चुदाई में लगा था वो कभी कभी मेरे पेट के पास से हाथ निकल कर मेरे लंड को भी मुठिया देता था , उसकी इस हरकत से मेरा लंड एक बार फिर खड़ा होने लगा था. मै भी उसके गांड के अंदर लंड डालने के वक्त गांड को कास लेता था जिससे उसको बहुत मजा आता था, लगभग १० मिनिट की लगातार चुदाई के बाद हमदोनो ही पसीने पसीने हो गए थे और वो भी झड़ने वाला था क्युकी उसकी पकड़ मेरी गांड के दोनों तरफ कड़ी होती जा रही थी अचानक उसके लंड ने मेरी गांड के अंदर गरम गरम पानी छोड दिया और वो मेरी गांड में पूरा लंड डालकर पीछे से चिपक गया, दो मिनिट बाद उसने अपने को सम्हाला और मेरी गांड से सिकुड़ा हुआ लंड पच की आवाज़ के साथ निकला और उसका मॉल गांड से निकल कर मेरी जांघ पे बहने लगा मैंने उससे कहा की “मेरे पैंट से रुमाल निकल कर पोंछ दे” .उसके पोछने के बाद मैंने कहा की “मेरा दिल अभी भरा नहीं है यार” तो वो बोला बाबूजी क्या मेरी गांड मरोगे काफी देर हो गई है दुकान में कोई नहीं है आप कल आना कल मेरी चुदाई कर लेना” मैंने कहा “नहीं ये बात नहीं तुम मेरे लंड को मुठ मार कर जूस निकल दो” उसने कहा “ठीक है बाबूजी” और वो मेरे पास आकार मेरे लंड को पकड़ कर जल्दी जल्दी मेरे लंड की खाल को आगे पीछे करते हुए मुठ मरने लगा, मै उसकी लुंगी पे अपने पैर फैला कर बैठ हुआ था और वो बड़ी सिद्दत से अपना काम कर रहा था लगभग ५ मिनिट के बाद मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है मैंने उससे कहा “मेरा जूस मुह में निकालो” और मै जल्दी से खड़ा होकर अपने हाथ से मुठ मारने लगा और उसने मुह खोल दिया मैंने अपने लौडे का सारा रस उसके मुह में गिरा दिया, पर जैसे ही मने अपने लौडे का आखिरी बूंद उसके मुह में गिराकर लंड हटाया उसने सारा जूस जमीं पे थूक दिया. मैंने कहा यार तुमने थूक क्यों दिया तू वो बोला “बाबूजी इसका क्या करता मै” मैंने कहा “इसको पी जाते ये बहुत प्रोटीन वाला होता है”. वो बोला “बाबूजी क्यों मजाक करते हो”मैंने कहा “भाई मै मजाक नहीं करता अगली बार मै तुम्हारे लंड का सारा जूस पियूँगा तब बताना मैंने मजाक किया था या सच बोला था” इसके बाद हमलोग वापश दुकान पे आ गए और मै अपने घर को चला गया.

दोस्तों अगर मेरी कहानी पसंद आये तो मेल जरुर करे

gay.200948@gmail.com
100% (1/0)
 
Categories: Gay Male
Posted by painlovercock
2 years ago    Views: 3,583
Comments
Reply for:
Reply text
Please login or register to post comments.
No comments