bas me gandu part 1

मेरा पहला गे अनुभव
होली की छुट्टियाँ होने वाली थी , और मैंने अपने दोस्तों के साथ वैष्णव देवी माँ के दर्शन करने जाने का प्लान बनाया,हमलोगों को ट्रेन का रिजर्वेशन नहीं मिला और हमें कानपुर से देल्ही बस से जाना था, हमलोग जिस दिन होली जलती है , उसी रात को बस से अपने सिटी से देल्ही के लिए रवाना हुए , त्यौहार होने की वजह से बहुत भीड़ थी और हम सब दोस्त तो शीट मिल जाने की वजह से बैठे थे पर बहुत सी सवारियां बिच रस्ते में खड़ी थी, जब बस चली तो थोड़ी दूर जाने के बाद कुछ सवारियां जहा जगह मिली बैठने लगी मेरे शीट के बगल में भी एक लगभग २५ इयर का लड़का बैठ गया था, रात के बारह बजे के बाद बस की काफी सवारी सो रही थी , लाइट भी बंद थी. मै भी लगभग आधी नींद में था तभी मुझे लगा की किसी ने मेरे जांघों पे अपना हाथ टिकाया मैंने टटोल कर देखा ये उसी लड़के का हाथ था वो मेरे पैर पे सर टिका कर सो रहा था, और हाँथ मेरे जांघों पे रखे था , मैंने सोचा कोई बात नहीं नींद में ऐसा हो जाता है , और वो हाथ रखे रहा , थोड़ी देर में मैंने महशुश किया की वो हाथ मेरे लंड के नजदीक आ गया था , न जाने मुझे क्यों अच्छा लगा और मै चुप चाप रहा पर मेरी नींद उड़ गई थी .मै चुपचाप आंखे बंद किये रहा, थोड़ी देर में महशूश किया की हाँथ मेरे लंड के ऊपर आकर रुक गया है ,मै कुछ कुछ समझने लगा था की ये लड़का गांडू है और इसको लंड चाहिए , उस समय मेरी भी उम्र २५ या २६ रही होगी , शादी मेरी भी हुई नहीं थी, और जॉब करने की वजह से सेक्स का टाइम और जुगाड भी नहीं मिलता था,
मुझे उसके लंड के ऊपर हाथ रखने से आनंद मिल रहा था और ये मजे की वजह से लंड भी खड़ा हूँ चला था, वो तो खिलाडी था जैसे ही मेरा लंड रंग में आने लगा वू समझ गया की मुझे मजा आ रहा है और उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही थोडा मुठी में दबाया , उसने जब दबाया तो लंड ने और अपना कमाल दिखाया वो पूरा मस्त हो गया और वो लड़का धीरे धीरे लंड को दबाने लगा.
मुझे मजा तो आ रहा था पर मै अब सेक्स के अधीन हो चूका था ,मुझे अब पूरा मजा लेने का मन हो रहा था, मैंने अपने शाल को अपने पैरों पे डाला और धीरे से अपने पैंट की चैन खोल कर लंड बहार निकला और उसको पकड़ा दिया. उसने भी आराम से शाल के अंदर मेरे लंड की टोपी की खाल निचे ऊपर करते हुए धीरे धीरे तरह तरह से मुझे मजा देना शुरू किया. मै चुप चाप अपने ऊपर कंट्रोल किये हुए बिना कोई आवाज़ निकले मस्ती लेता रहा , क्युकी मेरे दोस्त भी बगल में ही थे वो सो रहे थे पर बस की नींद आप तो जानते हो कैसी होती है वो जरा से में जग जाते और मै नहीं चाह्ता था की जो मै मस्ती ले रहा हू बिना पैसे की उसमे कोई खलल पड़े.
उसने मेरा लंड लगभग एक घंटे तक सहलाया कई बार तो लगता था की मेरा जूस निकल जायेगा पर वो बड़ा एक्सपर्ट था उसे समज आ जाता था की लंड का जूस निकलने ही वाला है वो मेरे लंड को रगड़ना बंद कर देता था , और ५ मिनिट के बाद फिर से लंड के टोपे को ऊँगली से सहलाते हुए पुरे लंड को धीरे धीरे दबाते हुए मुझे मस्ती दे रहा था. एक घंटा तो मैंने बर्दास्त किया न जाने कितना प्री कम निकला होगा मै भी कभी कभी अपने लंड को हाथ से दबाता था और मेरा हाथ में मेरे जूस से गीले हो जाते अब्ब रहा नहीं जा रहा था बस लगता था की मै झड ही जाऊंगा और दिल भी कर रहा था की मेरा पानी निकले पर जूस निकलने के समय होने वाले रिअक्शन को भी सम्हालना था. मैंने अपना रुमाल निकाल कर अपने हाथ में लंड के टोपे के पास कर लिया और उसके हाथ को जोर से दबाकर जताया की मेरा मॉल निकल दे वो समझ गया मै क्या चाह्ता हू , उसने अब्ब अपना दूसरा हाथ मेरे लंड के जड़ पे लगाकर जोर से पकड़ा और दूसरे हाथ पे मेरे ही लंड का पानी टोपे के चारो तरफ लगाकर केवल टोपी को ही रगड़ने लगा मै शांश रोक कर दांतों को कास कर बंद करके पुरे शरीर को कड़ा करके मॉल के बहार आने का इंतजार कर रहा था बो बड़ा सयाना था मुझे स्लो प्वैसन दे रहा था पर दो मिनिट बाद मेरी गोलिय लंड के और नजदीक आकार तहर गई लंड की सारी नसे फुल गई और मेरे लंड का सुपाडा बड़ा हो गया और मेरे रुमाल पे मॉल निकल पड़ा, न जाने कैसे मैंने खुद को काबू में रखा पर मेरे लंड से कितना मॉल निकला न मै देख सका न वो पर मैंने महशूश किया की अब्ब तक की मेरी सेक्स लाइफ का सबसे ज्यादा जूस निकला होगा. उसने मेरे हाथ से मेरा रुमाल ले लिया पता नहीं क्यों और मै भी थका हुआ जैसे दो मिल दौड कर आया हू चुपचाप गहरी गहरी शानसे लेता रहा. लगभग १५ मिनिट के बाद उसने मेरा रुमाल वापिस कर दिया वो गीला था पर उसमे मेरे जूस का चिपचिपा पन नहीं था मै समझ गया वो मेरा जूस चाट गया है मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्युकी मैंने बहुत सी चुदाई की पिक्चर में लड़की और लडको को वीर्य चाटते हुए देखा था , अब्ब मुझे नींद आ रही थी और रात का लगभग एक बज रहा था बस अपनी मंजिल की तरफ बढ़ी चली जा रही थी, १५ मिनिट के बाद ही ड्राईवर ने एक ढाबे पे गाड़ी रोक दी मज़बूरी में हमें भी निचे उतरना पड़ा मेरे दोस्तों ने मुझे वाही चाय भेजने को कहा मैंने उनके लिए चाय भेजी और खुद वाही पिने लगा .चाय पीकर मैंने एक सिगरेट पिने की सोची और सोचा सु सु भी कर लू , मै थोडा एकांत में सु सु करने गया और सिगरेट भी जला ली थी देखा वो लड़का भी मेरे पीछे पीछे ही सु सु करने आ रहा है , मैंने उससे पुचा तुम्हे ये सब कैसे चस्का लग गया तुम तू पढ़े लिखे मालूम होते हो, वो कुछ नहीं बोला मेरे बगल में आकार मूतने लगा मैंने उसका लंड देखा तो देखता ही रह गया , उसका लंड मेरे लंड से कम से कम ३ इंच बड़ा था और उसी अनुपात में मोटा भी. ये सब बाते मेरी समझ में नहीं आई की सुना था जू लोग नामर्द होते है या जिनको बवाशिर होती है वो लोग अक्सर गांड मरवाना पसंद करते है पर इसका तो लंड भी मस्त है ये ऐसा क्यों है. मै ने इस बात की तह तक जाने का निर्णय किया और उससे उसका नाम पता पुछा , उसने अपना नाम राकेश बताया और मेरे ही शहर में जॉब करता था पर रहने वाला टूंडला का था. जब उसने सुना मै उसी के सहर का हू तो वो भी खुश हुआ और उसने अपना पता बताया और कहा की जब मै वापश आउ तो किसी भी रविवार को उसके यहाँ आउ . उसके बाद हमलोग पुनः बस में सवार हुए और बस देल्ही की और चल पड़ी.
शेष अगले अंक में .............


कृपया मेल करे ताकि मै अपने गे जीवन की बहुत ही अच्छे अनुभव आपको बताऊ और आप उनको पढ़ कर एन्जॉय करे gay.200948@gmail.com


100% (2/0)
 
Categories: Gay Male
Posted by painlovercock
2 years ago    Views: 1,798
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