bas me gandu

पहला गे अनुभव २
दोस्तों मै पुनः आगे बढाता हू उम्मीद है आपने एन्जॉय की होगी मेरी कहानी मेरी जुबानी अब आगे ,
देल्ही के लिए बस जैसे ही आगे बही हमलोग साडी बस की सवारी पुनः सोने की तयारी करने लगे और बस की लाइट एक बार फिर बंद हो गई लगभग १५ मिनिट के बाद ही राकेश ने फिर से अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रखा मैंने पुछा की अभी दिल नहीं भरा क्या और मेरे दोस्त भी अभी पूरी तरह से सोये नहीं थे , वो धीरे से फुसफुसाया की नींद नहीं आ रही है तो टाइम कैसे पास होगा हमदोनो का मैंने भी सोचा ठीक है आखिर मजा तो मुझे भी आ ही रहा था मैंने फिर से अपना सोया हुआ लंड निकल के उसके हाथ में दे दिया और शाल ऊपर से डालकर सोने की एक्टिंग करने लगा , उसके थोड़े ही प्रयाश के बाद मेरे लंड में जान आने लगी और मेरा लंड फिर से तैयार हो गया वो अबकी बार बहुत सही पोजीसन लेकर बैठा था , उसने मुझे थोडा सा मुड़ने का इशारा किया मै समझ गया ये मेरे लंड को चूसना चाह्ता है. मुझे भी अब न जाने क्या हुआ कोई डर नहीं की कोई देखेगा केवल सेक्स ही दिखाई दे रहा था , मै थोडा सा मुडा और थोडा वो झुका उसके मुह में मेरा लंड जा चूका था, मैंने उसके सर पे शाल डाल ली और वो बिना शोर किये या आवाज़ निकले मेरे लंड की टोपी को चूसने लगा ज्यादा हिलने डुलने की जगह थी नहीं ,पर मेरा दिल तो करता था की खड़ा होकर इसके मुह की चुदाई कर दू , पर दोस्तों समय का तकाज़ा था की चुप चाप मस्ती लेते रहो , मैंने भी मस्ती ही लेने की सोची और उसके कान में ऊँगली से सहलाने लगा कभी कभी अपने लंड के साथ ही उसके मुह में ऊँगली भी चुसवा लेता , ये चुसाई लगभग अक्क घंटे तक चली क्युकी सुबह का ३.३० होने वाला था और मैंने भी सोचा की अब्ब जिस निकल देना चाहिए क्युकी लोग भी जग सकते थे सुसको इशारा किया अपने हाथ से अपने लंड को जल्दी जल्दी मुठ मर कर की कम खतम करो शायद वो भी थक गया था और यही चाह्ता था मैंने अपना वाही गीला रुमाल उसको दिया जो उसने पहली बार मेरे झड़ने पे चट्लिया था, उसने अपने हाथ से मेरे रुमाल को वापिस कर दिया और जीभ से जल्दी जल्दी मेरे लुंड के टोपे पे और पेशाब के छेद पे चाट ने लगा दूसरे हाथ से मेरे लंड के निचले शीरे को जोर से पकड़ लिया और मै थोड़ी ही देर में झड़ने लगा मेरा सारा जूस उसके मुह में ही निकला और उसने पहले तो मेरा लंड ढीला होने तक जूस मुह में ही रखा और लंड को चूसता रहा पर मुझे अब्ब लंड में दर्द होने लगा था क्युकी लगभग एक घंटे से ज्यादा उसके मुह में रहा था और दो बार पानी भी निकल चूका था , मैंने उसके मुह से लंड निकल कर रुमाल से साफ किया और सारा जूस वो गुटक गया .मैंने लंड साफ कर वापस पैंट के अंदर किया तो उसने फिर हाथ रख दिया मेरे लंड के ऊपर, मै बोला भाई क्या मेरे पप्पू की जन लोगे दो बार तुमने इसका पानी निकला और रात भर हम सोये नहीं अब्ब थोडा तो आराम कर लेने दो कल हमलोगों को दिन भर सफर करना है , वो बोला की आपका कम तो दो बार हुआ पर मै तो वैसा ही हू जैसा था तो मैंने कहा मै क्या सहायता कर सकता हू .हमलोग सारी बाते बहुत धीरे से कर रहे थे , ताकि कोई सुन न ले. उसने कहा की मै उसके लंड का भी जूस निकालू . मैंने कभी आज तक किसी का लंड पकड़ा भी नहीं था और वो लंड का पानी निकलने की बात कर रहा था मैंने साफ मन किया की मुझे ये सब नहीं करना और मैंने कभी किया भी नहीं सो तुम भाई खुद मुठ मार लो. उसने कहा की ठीक है आप अपने पैर से मोजा हटा दे मै आपके पैर पे रगड़ कर जूस निकाल दूँगा मैंने सोचा की अजीब आदमी है इसमें इसे क्या मजा आएगा ,पर मुझे किसी तरह उससे पीछा छुड़ाना था सो मैंने अपना जूता मोजा निकाल दिया एक पैर का और उसने अपना लंड निकाल लिया उसका लंड जब मेरे पैर में टच हुआ तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा और उत्तेजना भी हुई वो अपने एक हाथ से लुंड को हिला रहा था और एक हाथ मेरे लंड पे पैंट के ऊपर से रख कर दबा रहा था, अब मै सोच रहा था कब इसका मॉल निकले और मै सौ तू मैंने अपने पैर के अंगूठे से उसके लंड के टोपे को रगड़ना शुरू किया , जैसे ही मैंने रगड़ना शुरू किया उसने जोर से मेरे लुंड को मुठी में भर लिया और अपने सर को मेरी गोद में दबाया , मै समझ गया की इसका कम भी अब्ब हो जायेगा. तो मै भी जल्दी जल्दी उसके लुंड की टोपी को पैर के अंगूठे से रगड़ने लगा मुझे थोडा गीला सा महशूश हुआ तो मै समझा की वो झड गया और मैंने पैर हटा लिया तो वो फुसफुसाया की हटा क्यों लिया आपने पैर मै बोला क्यों झाडा नहीं तुम्हारा वो बोला बस थोड़ी देर में झड जायेगा मै उसकी हेल्प करू मैंने फिर से उसके लुंड कू अपने अंगूठे और बाकि उंगलियों से मसाज देना शुरू किया थोड़ी ही देर में उसका मॉल निकाल गया और मेरे सरे पैर के ऊपर ही उसने झटके ले लेकर गिराया गिराने के बाद उसने मेरा रुमाल लेकर उसमे मेरे पैर पोंछकर मेरे जुटे मोज़े पहनाये और धन्यवाद दिया , फिर मै दूसरी तरफ होकर सो गया , मुझे बहुत तगड़ी नींद आ गई लगभग सुबह ६ बजे मेरी नींद टूटी तो देखा वो कही नहीं था और न जाने किस जगह उतर गया था , पर उसने मुझे पता तो दिया ही था ,इसलिए फिर से मिलने की उम्मीद थी , फिर मै माँ वैष्णव देवी के दर्शन करने के बाद जब वापस अपने सहर आया तो पहला रविवार पड़ते ही उसके घर गया ,मैंने जैसे ही उसके घर की बेल बजाई तो उसका माकन मालिक निकला मैंने राकेश के बारे में पुचा तो उसने कहा कही गए है अभी आते होंगे ,मै इंतजार करने लगा ................

शेष अगले भाग में ............................

अगर आप लोगो को मेरी कहानिया जरा भी पसंद आ रही हो तो कृपया मुझे मेल जरुर करे ताकि मै और दिल से लिखू पर ये सभी कहानिया बिलकुल सच्ची है ,
Gay.200948@gmail.com

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Categories: Gay Male
Posted by painlovercock
2 years ago    Views: 3,565
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